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ramayan 2.83.4: यात्रा में तत्पर रहने वाले यशस्वी राजकुमार भरत के पीछे साठ हजार रथी और नाना प्रकार के अस्त्र-शस्त्रों से सुसज्जित धनुर्धर योद्धा चल रहे थे॥4॥   |   ramayan सर्ग 2.83: भरत की वनयात्रा और शृङ्गवेरपुर में रात्रिवास   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 83: भरत की वनयात्रा और शृङ्गवेरपुर में रात्रिवास  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  2.83.4 
षष्ठी रथसहस्राणि धन्विनो विविधायुधा:।
अन्वयुर्भरतं यान्तं राजपुत्रं यशस्विनम्॥ ४॥
 
 
अनुवाद
यात्रा में तत्पर रहने वाले यशस्वी राजकुमार भरत के पीछे साठ हजार रथी और नाना प्रकार के अस्त्र-शस्त्रों से सुसज्जित धनुर्धर योद्धा चल रहे थे॥4॥
 
Sixty thousand chariots and archer warriors armed with various kinds of weapons were following the famous Prince Bharata who was devoted to travelling. ॥ 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)