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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 83: भरत की वनयात्रा और शृङ्गवेरपुर में रात्रिवास  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  2.83.26 
निवेश्य गङ्गामनु तां महानदीं
चमूं विधानै: परिबर्हशोभिनीम्।
उवास रामस्य तदा महात्मनो
विचिन्तमानो भरतो निवर्तनम्॥ २६॥
 
 
अनुवाद
उस समय भरत अपनी सेना को तंबू आदि से सुसज्जित करके विशाल गंगा नदी के तट पर खड़े होकर, महाबली राम के लौटने के विषय में सोचते हुए वहीं ठहर गये।
 
Having arranged his army, decorated with tents etc., on the bank of the mighty river Ganga, Bharata stayed there at that time, thinking about the return of the great Rama.
 
इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीये आदिकाव्येऽयोध्याकाण्डे त्र्यशीतितम: सर्ग:॥ ८३॥
इस प्रकार श्रीवाल्मीकिनिर्मित आर्षरामायण आदिकाव्यके अयोध्याकाण्डमें तिरासीवाँ सर्ग पूरा हुआ॥ ८३॥
 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)