श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 83: भरत की वनयात्रा और शृङ्गवेरपुर में रात्रिवास  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  2.83.23 
निवेशयत मे सैन्यमभिप्रायेण सर्वत:।
विश्रान्ता: प्रतरिष्याम: श्व इमां सागरङ्गमाम्॥ २३॥
 
 
अनुवाद
‘तुम सब लोग मेरे सैनिकों को उनकी इच्छानुसार सभी स्थानों पर यहाँ तैनात करो। आज रात्रि विश्राम करके हम सब लोग कल प्रातःकाल इस सागरगामी गंगाजी को पार करेंगे।॥ 23॥
 
‘You all should place my soldiers here at all places according to their wish. After taking rest tonight, we all will cross this ocean-going river Gangaji tomorrow morning.॥ 23॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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