श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 83: भरत की वनयात्रा और शृङ्गवेरपुर में रात्रिवास  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  2.83.22 
निरीक्ष्यानुत्थितां सेनां तां च गङ्गां शिवोदकाम्।
भरत: सचिवान् सर्वानब्रवीद् वाक्यकोविद:॥ २२॥
 
 
अनुवाद
पवित्र भागीरथी नदी को देखकर अपनी सेना को क्षीण होते देख, वार्तालाप कला में निपुण भरत ने अपने सब सचिवों से कहा - ॥22॥
 
Seeing his army weakened after seeing the holy river Bhagirathi, Bharata who was skilled in the art of conversation said to all his secretaries - ॥22॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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