श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 83: भरत की वनयात्रा और शृङ्गवेरपुर में रात्रिवास  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  2.83.21 
उपेत्य तीरं गङ्गायाश्चक्रवाकैरलंकृतम्।
व्यवतिष्ठत सा सेना भरतस्यानुयायिनी॥ २१॥
 
 
अनुवाद
चक्रवाकों से सुसज्जित गंगा तट पर पहुँचकर भरत के पीछे आती हुई सेना रुक गई ॥21॥
 
After reaching the banks of Ganga decorated with Chakravakas, the army following Bharat stopped. 21॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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