श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 83: भरत की वनयात्रा और शृङ्गवेरपुर में रात्रिवास  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  2.83.20 
यत्र रामसखा वीरो गुहो ज्ञातिगणैर्वृत:।
निवसत्यप्रमादेन देशं तं परिपालयन्॥ २०॥
 
 
अनुवाद
जहाँ श्री राम के मित्र, वीर निषादराज गुह, अपने भाइयों और संबंधियों के साथ रहते हुए, उस देश की सावधानीपूर्वक रक्षा करते थे।
 
Where Sri Rama's friend, the valiant Nishadraja Guha, lived with his brothers and relatives, carefully protecting that country.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)