| श्रीमद् वाल्मीकि रामायण » काण्ड 2: अयोध्या काण्ड » सर्ग 82: वसिष्ठजी का भरत को राज्य पर अभिषिक्त होने के लिये आदेश देना,भरत का उसे अनुचित बताकर श्रीराम को लाने के लिये वन में चलने की तैयारी का आदेश देना » श्लोक 32 |
|
| | | | श्लोक 2.82.32  | तत: समुत्थाय कुले कुले ते
राजन्यवैश्या वृषलाश्च विप्रा:।
अयूयुजन्नुष्ट्ररथान् खरांश्च
नागान् हयांश्चैव कुलप्रसूतान्॥ ३२॥ | | | | | | अनुवाद | | तब प्रत्येक घर के ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र उठे और अच्छी नस्ल के घोड़े, हाथी, ऊँट, गधे और रथ जोतने लगे। | | | | Then the Brahmins, Kshatriyas, Vaishyas and Shudras of every household got up and began harnessing the good breed of horses, elephants, camels, donkeys and chariots. | | | इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीये आदिकाव्येऽयोध्याकाण्डे द्वॺशीतितम: सर्ग:॥ ८२॥
इस प्रकार श्रीवाल्मीकिनिर्मित आर्षरामायण आदिकाव्यके अयोध्याकाण्डमें बयासीवाँ सर्ग पूरा हुआ॥ ८२॥ | | | | ✨ ai-generated | | |
|
|