श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 82: वसिष्ठजी का भरत को राज्य पर अभिषिक्त होने के लिये आदेश देना,भरत का उसे अनुचित बताकर श्रीराम को लाने के लिये वन में चलने की तैयारी का आदेश देना  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  2.82.27 
सज्जं तु तद् बलं दृष्ट्वा भरतो गुरुसंनिधौ।
रथं मे त्वरयस्वेति सुमन्त्रं पार्श्वतोऽब्रवीत्॥ २७॥
 
 
अनुवाद
सेना को कूच के लिए तैयार देखकर भरत ने अपने गुरु के पास खड़े सुमन्तराम से कहा, 'कृपया मेरा रथ शीघ्र तैयार करके ले आइए।'
 
Seeing the army ready for the march, Bharata said to Sumantram who was standing next to his Guru, 'Please prepare my chariot quickly and bring it.'
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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