श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 82: वसिष्ठजी का भरत को राज्य पर अभिषिक्त होने के लिये आदेश देना,भरत का उसे अनुचित बताकर श्रीराम को लाने के लिये वन में चलने की तैयारी का आदेश देना  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  2.82.26 
ते हयैर्गोरथै: शीघ्रं स्यन्दनैश्च मनोजवै:।
सह योषिद्‍बलाध्यक्षा बलं सर्वमचोदयन्॥ २६॥
 
 
अनुवाद
सेनापतियों ने मन के समान वेगवान घोड़ों, गाड़ियों और रथों सहित सारी सेना को स्त्रियों सहित शीघ्र ही यात्रा के लिए तैयार होने का आदेश दिया॥ 26॥
 
The commanders ordered the entire army, including horses, carts and chariots as fast as the mind, along with the women, to quickly get ready for the journey.॥ 26॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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