श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 82: वसिष्ठजी का भरत को राज्य पर अभिषिक्त होने के लिये आदेश देना,भरत का उसे अनुचित बताकर श्रीराम को लाने के लिये वन में चलने की तैयारी का आदेश देना  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  2.82.23 
एवमुक्त: सुमन्त्रस्तु भरतेन महात्मना।
प्रहृष्ट: सोऽदिशत् सर्वं यथासंदिष्टमिष्टवत्॥ २३॥
 
 
अनुवाद
महात्मा भरत के ऐसा कहने पर सुमन्तराम ने बड़ी प्रसन्नता से उनके कहे अनुसार सबको मधुर संदेश सुनाया ॥23॥
 
When Mahatma Bharat said this, Sumantram very happily conveyed the sweet message to everyone as per his instructions. ॥23॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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