श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 82: वसिष्ठजी का भरत को राज्य पर अभिषिक्त होने के लिये आदेश देना,भरत का उसे अनुचित बताकर श्रीराम को लाने के लिये वन में चलने की तैयारी का आदेश देना  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  2.82.19 
सर्वोपायं तु वर्तिष्ये विनिवर्तयितुं बलात्।
समक्षमार्यमिश्राणां साधूनां गुणवर्तिनाम्॥ १९॥
 
 
अनुवाद
'मैं आप सब श्रेष्ठ एवं सम्माननीय सभासदों के समक्ष श्री रामजी को बलपूर्वक वापस लाने का हरसंभव प्रयत्न करूँगा।॥19॥
 
'I shall try every possible way to bring back Sri Rama by force in the presence of all you, the most virtuous and respectable members of the assembly.॥ 19॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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