श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 82: वसिष्ठजी का भरत को राज्य पर अभिषिक्त होने के लिये आदेश देना,भरत का उसे अनुचित बताकर श्रीराम को लाने के लिये वन में चलने की तैयारी का आदेश देना  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  2.82.16 
राममेवानुगच्छामि स राजा द्विपदां वर:।
त्रयाणामपि लोकानां राघवो राज्यमर्हति॥ १६॥
 
 
अनुवाद
मैं केवल श्री रामजी का ही अनुसरण करूँगा। मनुष्यों में श्रेष्ठ श्री रघुनाथजी इस राज्य के राजा हैं। वे तीनों लोकों के राजा होने के योग्य हैं।॥16॥
 
'I will follow only Shri Ram. Shri Raghunathji, the best among humans, is the king of this kingdom. He is worthy of being the king of all the three worlds.'॥ 16॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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