श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 82: वसिष्ठजी का भरत को राज्य पर अभिषिक्त होने के लिये आदेश देना,भरत का उसे अनुचित बताकर श्रीराम को लाने के लिये वन में चलने की तैयारी का आदेश देना  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  2.82.13 
ज्येष्ठ: श्रेष्ठश्च धर्मात्मा दिलीपनहुषोपम:।
लब्धुमर्हति काकुत्स्थो राज्यं दशरथो यथा॥ १३॥
 
 
अनुवाद
'पुण्यवान श्री राम मुझसे बड़े हैं और गुणों में भी श्रेष्ठ हैं। वे दिलीप और नहुष के समान यशस्वी हैं; अतः राजा दशरथ के समान वे ही इस राज्य के अधिकारी हैं।॥13॥
 
‘The virtuous Shri Ram is older than me and also superior in qualities. He is as illustrious as Dilip and Nahush; therefore, like King Dasharath, he alone is entitled to inherit this kingdom.॥ 13॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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