श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 81: प्रातःकाल के मङ्गलवाद्य-घोष को सुनकर भरत का दुःखी होना और उसे बंद कराकर विलाप करना, वसिष्ठजी का सभा में आकर मन्त्री आदि को बुलाने के लिये दूत भेजना  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  2.81.9 
तथा तस्मिन् विलपति वसिष्ठो राजधर्मवित्।
सभामिक्ष्वाकुनाथस्य प्रविवेश महायशा:॥ ९॥
 
 
अनुवाद
जब भरत इस प्रकार विलाप कर रहे थे, उसी समय राजधर्म के ज्ञाता महामुनि वसिष्ठ ने इक्ष्वाकुनाथ राजा दशरथ की सभा में प्रवेश किया॥9॥
 
While Bharata was mourning like this, at the same time the great sage Vasistha, the expert of royal religion, entered the assembly hall of Ikshvakunath king Dasharatha. 9॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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