श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 81: प्रातःकाल के मङ्गलवाद्य-घोष को सुनकर भरत का दुःखी होना और उसे बंद कराकर विलाप करना, वसिष्ठजी का सभा में आकर मन्त्री आदि को बुलाने के लिये दूत भेजना  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  2.81.16 
ह्रद इव तिमिनागसंवृत:
स्तिमितजलो मणिशङ्खशर्कर:।
दशरथसुतशोभिता सभा
सदशरथेव बभूव सा पुरा॥ १६॥
 
 
अनुवाद
तिमि नामक महान मछली और जल हाथी से युक्त समुद्र के जलाशय के समान, शांत जल और मुक्ता आदि रत्नों से युक्त वह सभा दशरथपुत्र भरत के द्वारा सुशोभित हो गई और जैसी पूर्वकाल में राजा दशरथ के होने से शोभा पाती थी, वैसी ही शोभा प्राप्त करने लगी॥16॥
 
Like the reservoir of the sea with the great fish named Timi and the water elephant, with the still water and the gems like Mukta etc., that assembly was decorated with Bharat, the son of Dashrath, and started getting the same beauty as it used to get the beauty due to the presence of King Dasharatha in earlier times*॥ 16॥
 
इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीये आदिकाव्येऽयोध्याकाण्डे एकाशीतितम: सर्ग:॥ ८१॥
इस प्रकार श्रीवाल्मीकिनिर्मित आर्षरामायण आदिकाव्यके अयोध्याकाण्डमें इक्यासीवाँ सर्ग पूरा हुआ॥ ८१॥
 
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