ब्राह्मणान् क्षत्रियान् योधानमात्यान् गणवल्लभान्।
क्षिप्रमानयताव्यग्रा: कृत्यमात्ययिकं हि न:॥ १२॥
सराजपुत्रं शत्रुघ्नं भरतं च यशस्विनम्।
युधाजितं सुमन्त्रं च ये च तत्र हिता जना:॥ १३॥
अनुवाद
तुम लोग शान्त भाव से जाकर ब्राह्मणों, क्षत्रियों, योद्धाओं, मन्त्रियों और सेनापतियों को शीघ्र बुलाओ। यशस्वी भरत और शत्रुघ्न को, अन्य राजकुमारों, मन्त्रियों युधाजित्, सुमन्तराम तथा वहाँ उपस्थित अन्य सभी शुभचिन्तकों को भी बुलाओ। हमें उनसे अत्यन्त आवश्यक कार्य है।॥12-13॥
‘You all should go calmly and call the Brahmins, Kshatriyas, warriors, ministers and commanders quickly. Call the famous Bharata and Shatrughna along with other princes, ministers Yudhajit and Sumantram and all the other well wishers present there. We have very important work with them.’॥12-13॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥