| श्रीमद् वाल्मीकि रामायण » काण्ड 2: अयोध्या काण्ड » सर्ग 8: मन्थरा का पुनः राज्याभिषेक को कैकेयी के लिये अनिष्टकारी बताना, कुब्जा का पुनः श्रीराम राज्य को भरत के लिये भयजनक बताकर कैकेयी को भड़काना » श्लोक 5 |
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| | | | श्लोक 2.8.5  | भरतादेव रामस्य राज्यसाधारणाद् भयम्।
तद् विचिन्त्य विषण्णास्मि भयं भीताद्धि जायते॥ ५॥ | | | | | | अनुवाद | | यह राज्य भरत और राम दोनों के लिए समान भोग की वस्तु है, इस पर दोनों का समान अधिकार है, इसीलिए श्री राम भरत से ही डरते हैं। ऐसा सोचकर मैं शोक में डूब गया हूँ; क्योंकि भय तो भय से ही उत्पन्न होता है अर्थात् जो आज भयभीत है, जब वह राज्य पाकर बलवान हो जाएगा, तब अपने भय के कारण को जड़ से उखाड़ फेंकेगा॥5॥ | | | | ‘This kingdom is a common object of enjoyment for both Bharat and Rama, both have equal rights over it, that is why Shri Ram fears Bharat only. Thinking this, I am drowned in sorrow; because fear comes from fear itself i.e. the one who is afraid today, when he gets the kingdom and becomes strong, then he will uproot the reason of his fear.॥ 5॥ | | ✨ ai-generated | | |
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