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श्लोक 2.8.39  |
यदा हि राम: पृथिवीमवाप्स्यते
ध्रुवं प्रणष्टो भरतो भविष्यति।
अतो हि संचिन्तय राज्यमात्मजे
परस्य चैवास्य विवासकारणम्॥ ३९॥ |
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| अनुवाद |
| 'याद रखो, जब श्री राम इस पृथ्वी पर अधिकार कर लेंगे, तब तुम्हारे पुत्र भरत का विनाश अवश्य होगा। इसलिए कोई ऐसा उपाय सोचो जिससे तुम्हारे पुत्र को राज्य मिले और शत्रु श्री राम को वनवास हो जाए।' |
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| 'Remember, when Shri Ram gains control over this earth, then your son Bharat will surely be destroyed. So think of a way by which your son gets the kingdom and the enemy Shri Ram is exiled.' |
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इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीये आदिकाव्येऽयोध्याकाण्डेऽष्टम: सर्ग:॥ ८॥
इस प्रकार श्रीवाल्मीकिनिर्मित आर्षरामायण आदिकाव्यके अयोध्याकाण्डमें आठवाँ सर्ग पूरा हुआ॥ ८॥ |
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