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ramayan 2.8.37: 'तुमने पहले अपने पति से प्राप्त हुए अपार प्रेम के कारण अभिमानवश उनका अनादर किया था; किन्तु तुम्हारी सहधर्मिणी श्री राममाता कौसल्या पुत्र को राज्य करने के कारण परम सौभाग्यशाली हो गई हैं; अब वे तुमसे अपने वैर का बदला क्यों नहीं लेंगी?॥ 37॥   |   ramayan सर्ग 2.8: मन्थरा का पुनः राज्याभिषेक को कैकेयी के लिये अनिष्टकारी बताना, कुब्जा का पुनः श्रीराम राज्य को भरत के लिये भयजनक बताकर कैकेयी को भड़काना   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 8: मन्थरा का पुनः राज्याभिषेक को कैकेयी के लिये अनिष्टकारी बताना, कुब्जा का पुनः श्रीराम राज्य को भरत के लिये भयजनक बताकर कैकेयी को भड़काना  »  श्लोक 37
 
 
श्लोक  2.8.37 
दर्पान्निराकृता पूर्वं त्वया सौभाग्यवत्तया।
राममाता सपत्नी ते कथं वैरं न यापयेत्॥ ३७॥
 
 
अनुवाद
'तुमने पहले अपने पति से प्राप्त हुए अपार प्रेम के कारण अभिमानवश उनका अनादर किया था; किन्तु तुम्हारी सहधर्मिणी श्री राममाता कौसल्या पुत्र को राज्य करने के कारण परम सौभाग्यशाली हो गई हैं; अब वे तुमसे अपने वैर का बदला क्यों नहीं लेंगी?॥ 37॥
 
'You had earlier disrespected her out of pride due to the immense love you had received from your husband, but your co-wife Shri Rammata Kausalya has become extremely fortunate on getting a son to rule; why will she not take revenge for her enmity against you now?॥ 37॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)