श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 8: मन्थरा का पुनः राज्याभिषेक को कैकेयी के लिये अनिष्टकारी बताना, कुब्जा का पुनः श्रीराम राज्य को भरत के लिये भयजनक बताकर कैकेयी को भड़काना  »  श्लोक 36
 
 
श्लोक  2.8.36 
अभिद्रुतमिवारण्ये सिंहेन गजयूथपम्।
प्रच्छाद्यमानं रामेण भरतं त्रातुमर्हसि॥ ३६॥
 
 
अनुवाद
जैसे वन में हाथियों के दल के सरदार पर सिंह आक्रमण कर देता है और वह भाग जाता है, उसी प्रकार राजा राम भरत का तिरस्कार करेंगे; अतः तुम भरत को उस तिरस्कार से बचाओ।
 
Just as a lion attacks the leader of a herd of elephants in a forest and he runs away, in the same manner King Rama will scorn Bharata; therefore you must protect Bharata from that scorn.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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