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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
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काण्ड 2: अयोध्या काण्ड
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सर्ग 8: मन्थरा का पुनः राज्याभिषेक को कैकेयी के लिये अनिष्टकारी बताना, कुब्जा का पुनः श्रीराम राज्य को भरत के लिये भयजनक बताकर कैकेयी को भड़काना
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श्लोक 33
श्लोक
2.8.33
तस्माद् राजगृहादेव वनं गच्छतु राघव:।
एतद्धि रोचते मह्यं भृशं चापि हितं तव॥ ३३॥
अनुवाद
अतः आप भगवान् रामचन्द्रजी के महलसे सीधे वनमें चले जाएँ - यही मुझे अच्छा लगता है और इसीमें आपका हित है॥ 33॥
‘Therefore you should go straight to the forest from the palace of Lord Ramachandra – this seems best to me and this is in your best interest.॥ 33॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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