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ramayan 2.8.32: 'अतः श्री राम लक्ष्मण का तो किंचितमात्र भी अनिष्ट नहीं करेंगे, किन्तु भरत का अनिष्ट किए बिना नहीं रह सकते; इसमें संशय नहीं है ॥32॥   |   ramayan सर्ग 2.8: मन्थरा का पुनः राज्याभिषेक को कैकेयी के लिये अनिष्टकारी बताना, कुब्जा का पुनः श्रीराम राज्य को भरत के लिये भयजनक बताकर कैकेयी को भड़काना   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 8: मन्थरा का पुनः राज्याभिषेक को कैकेयी के लिये अनिष्टकारी बताना, कुब्जा का पुनः श्रीराम राज्य को भरत के लिये भयजनक बताकर कैकेयी को भड़काना  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  2.8.32 
तस्मान्न लक्ष्मणे राम: पापं किंचित् करिष्यति।
रामस्तु भरते पापं कुर्यादेव न संशय:॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
'अतः श्री राम लक्ष्मण का तो किंचितमात्र भी अनिष्ट नहीं करेंगे, किन्तु भरत का अनिष्ट किए बिना नहीं रह सकते; इसमें संशय नहीं है ॥32॥
 
'Therefore, Shri Ram will not do even the slightest harm to Lakshmana, but he cannot live without doing harm to Bharat; There is no doubt in it. 32॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)