श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 8: मन्थरा का पुनः राज्याभिषेक को कैकेयी के लिये अनिष्टकारी बताना, कुब्जा का पुनः श्रीराम राज्य को भरत के लिये भयजनक बताकर कैकेयी को भड़काना  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  2.8.31 
गोप्ता हि रामं सौमित्रिर्लक्ष्मणं चापि राघव:।
अश्विनोरिव सौभ्रात्रं तयोर्लोकेषु विश्रुतम्॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
'सुमित्रकुमार लक्ष्मण श्री रामजी की रक्षा करते हैं और श्री रामजी उनकी रक्षा करते हैं। उन दोनों का महान भ्रातृप्रेम दोनों अश्विनीकुमारों के समान तीनों लोकों में प्रसिद्ध है। 31॥
 
'Sumitra Kumar Lakshman protects Shri Ram and Shri Ram protects him. The great brotherly love of both of them is famous in all the three worlds like the two Ashwini Kumars. 31॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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