Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 2.8.30: कहते हैं कि जंगल से लकड़ियाँ बेचकर अपनी जीविका चलाने वाले कुछ लोगों ने एक पेड़ काटने का निश्चय किया, लेकिन वह पेड़ काँटेदार झाड़ियों से घिरा हुआ था; इसलिए वे उसे काट नहीं सके। इस प्रकार, उन काँटेदार झाड़ियों के पास होने से वह पेड़ बड़े संकट से बच गया। 30. | ramayan सर्ग 2.8: मन्थरा का पुनः राज्याभिषेक को कैकेयी के लिये अनिष्टकारी बताना, कुब्जा का पुनः श्रीराम राज्य को भरत के लिये भयजनक बताकर कैकेयी को भड़काना । ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
श्रूयते हि द्रुम: कश्चिच्छेत्तव्यो वनजीवनै:।
संनिकर्षादिषीकाभिर्मोचित: परमाद् भयात्॥ ३०॥
अनुवाद
कहते हैं कि जंगल से लकड़ियाँ बेचकर अपनी जीविका चलाने वाले कुछ लोगों ने एक पेड़ काटने का निश्चय किया, लेकिन वह पेड़ काँटेदार झाड़ियों से घिरा हुआ था; इसलिए वे उसे काट नहीं सके। इस प्रकार, उन काँटेदार झाड़ियों के पास होने से वह पेड़ बड़े संकट से बच गया। 30.
‘It is said that some people who earn their livelihood by selling wood from the forest decided to cut down a tree, but that tree was surrounded by thorny bushes; therefore they could not cut it. In this way, those thorny bushes being nearby saved that tree from great danger. 30.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥