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ramayan 2.8.3: देवी! जब तुम घोर संकट में होती हो, तब शोक करने के स्थान पर तुम प्रसन्न होती हो। तुम्हारी यह दशा देखकर मेरे हृदय में बड़ी पीड़ा हो रही है। मैं दुःख से व्याकुल हो रहा हूँ।   |   ramayan सर्ग 2.8: मन्थरा का पुनः राज्याभिषेक को कैकेयी के लिये अनिष्टकारी बताना, कुब्जा का पुनः श्रीराम राज्य को भरत के लिये भयजनक बताकर कैकेयी को भड़काना   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 8: मन्थरा का पुनः राज्याभिषेक को कैकेयी के लिये अनिष्टकारी बताना, कुब्जा का पुनः श्रीराम राज्य को भरत के लिये भयजनक बताकर कैकेयी को भड़काना  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  2.8.3 
मनसा प्रसहामि त्वां देवि दु:खार्दिता सती।
यच्छोचितव्ये हृष्टासि प्राप्य त्वं व्यसनं महत्॥ ३॥
 
 
अनुवाद
देवी! जब तुम घोर संकट में होती हो, तब शोक करने के स्थान पर तुम प्रसन्न होती हो। तुम्हारी यह दशा देखकर मेरे हृदय में बड़ी पीड़ा हो रही है। मैं दुःख से व्याकुल हो रहा हूँ।
 
Devi! When you are in great trouble, instead of mourning you are rejoicing. Seeing your condition I have to bear great pain in my heart. I am getting restless with sorrow.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)