श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 8: मन्थरा का पुनः राज्याभिषेक को कैकेयी के लिये अनिष्टकारी बताना, कुब्जा का पुनः श्रीराम राज्य को भरत के लिये भयजनक बताकर कैकेयी को भड़काना  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  2.8.29 
भरतानुवशात् सोऽपि शत्रुघ्नस्तत्समं गत:।
लक्ष्मणो हि यथा रामं तथायं भरतं गत:॥ २९॥
 
 
अनुवाद
भरत के कहने पर शत्रुघ्न भी उनके साथ गए (यदि वे वहाँ होते तो भरत का काम बिगड़ता नहीं, क्योंकि -) जैसे लक्ष्मण राम के अनुयायी हैं, वैसे ही शत्रुघ्न भी भरत के अनुयायी होंगे॥ 29॥
 
‘At Bharata's request, Shatrughna also went with him (had he been there, Bharata's work would not have been spoiled because -) Just as Lakshmana is a follower of Rama, in the same way Shatrughna will follow Bharata.॥ 29॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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