श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 8: मन्थरा का पुनः राज्याभिषेक को कैकेयी के लिये अनिष्टकारी बताना, कुब्जा का पुनः श्रीराम राज्य को भरत के लिये भयजनक बताकर कैकेयी को भड़काना  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  2.8.28 
बाल एव तु मातुल्यं भरतो नायितस्त्वया।
संनिकर्षाच्च सौहार्दं जायते स्थावरेष्विव॥ २८॥
 
 
अनुवाद
आपने भरत को बहुत ही कम उम्र में उसके मामा के घर भेज दिया था। पास रहने से सद्भावना बढ़ती है। यह स्थावर प्राणियों में भी देखी जाती है (लताएँ और वृक्ष भी जब एक-दूसरे के पास आते हैं, तो परस्पर आलिंगन में बंध जाते हैं। यदि भरत यहाँ होते, तो राजा का स्नेह उन पर भी उतना ही बढ़ता; अतः वे उन्हें भी आधा राज्य दे देते)।॥28॥
 
‘You sent Bharata to his maternal uncle's house at a very young age. Harmony develops by living close. This is also seen in immobile beings (creepers and trees, when they come close to each other, get bound in mutual embrace. Had Bharata been here, the king's affection for him would have increased equally; hence he would have given him half the kingdom as well).॥ 28॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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