श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 8: मन्थरा का पुनः राज्याभिषेक को कैकेयी के लिये अनिष्टकारी बताना, कुब्जा का पुनः श्रीराम राज्य को भरत के लिये भयजनक बताकर कैकेयी को भड़काना  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  2.8.21 
अनर्थदर्शिनी मौर्ख्यान्नात्मानमवबुध्यसे।
शोकव्यसनविस्तीर्णे मज्जन्ती दु:खसागरे॥ २१॥
 
 
अनुवाद
रानी! तुम मूर्खतापूर्वक विपत्ति को अच्छा समझ रही हो। तुम्हें अपनी स्थिति का ज्ञान नहीं है। तुम दुःख के सागर में डूब रही हो, जो शोक (प्रियतम से वियोग की चिंता) और आसक्ति (बुरी वस्तु मिलने का दुःख) के कारण बढ़ता ही जा रहा है।
 
Queen! You are foolishly considering disaster as good. You do not know your condition. You are drowning in the ocean of sorrow which is getting expanded due to grief (worry of separation from the beloved) and addiction (grief of getting something bad).
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd