श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 8: मन्थरा का पुनः राज्याभिषेक को कैकेयी के लिये अनिष्टकारी बताना, कुब्जा का पुनः श्रीराम राज्य को भरत के लिये भयजनक बताकर कैकेयी को भड़काना  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  2.8.17 
सा त्वमभ्युदये प्राप्ते दह्यमानेव मन्थरे।
भविष्यति च कल्याणे किमिदं परितप्यसे॥ १७॥
 
 
अनुवाद
मन्थरा! ऐसे महान् ऐश्वर्य के समय, जब भविष्य में केवल सौभाग्य ही दिखाई दे रहा है, तू इस प्रकार क्रोध से क्यों जल रही है?॥17॥
 
‘Manthra! At the time of such great prosperity, when only good fortunes are visible in the future, why are you burning with rage like this?॥ 17॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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