Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
ramayan 2.8.14: 'कुब्ज! श्री राम धर्म के ज्ञाता, गुणवान, बुद्धिमान, कृतज्ञ, सत्यवादी और धर्मात्मा होने के साथ-साथ महाराज के ज्येष्ठ पुत्र हैं; अतः वे ही युवराज होने के योग्य हैं।   |   ramayan सर्ग 2.8: मन्थरा का पुनः राज्याभिषेक को कैकेयी के लिये अनिष्टकारी बताना, कुब्जा का पुनः श्रीराम राज्य को भरत के लिये भयजनक बताकर कैकेयी को भड़काना   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 8: मन्थरा का पुनः राज्याभिषेक को कैकेयी के लिये अनिष्टकारी बताना, कुब्जा का पुनः श्रीराम राज्य को भरत के लिये भयजनक बताकर कैकेयी को भड़काना  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  2.8.14 
धमर्ज्ञो गुणवान् दान्त: कृतज्ञ: सत्यवान् शुचि:।
रामो राजसुतो ज्येष्ठो यौवराज्यमतोऽर्हति॥ १४॥
 
 
अनुवाद
'कुब्ज! श्री राम धर्म के ज्ञाता, गुणवान, बुद्धिमान, कृतज्ञ, सत्यवादी और धर्मात्मा होने के साथ-साथ महाराज के ज्येष्ठ पुत्र हैं; अतः वे ही युवराज होने के योग्य हैं।
 
'Kubje! Shri Ram is the eldest son of the Maharaja along with being knowledgeable of religion, virtuous, intelligent, grateful, truthful and pious; Therefore, he is the only one worthy of being the crown prince.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)