श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 8: मन्थरा का पुनः राज्याभिषेक को कैकेयी के लिये अनिष्टकारी बताना, कुब्जा का पुनः श्रीराम राज्य को भरत के लिये भयजनक बताकर कैकेयी को भड़काना  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  2.8.12 
हृष्टा: खलु भविष्यन्ति रामस्य परमा: स्त्रिय:।
अप्रहृष्टा भविष्यन्ति स्नुषास्ते भरतक्षये॥ १२॥
 
 
अनुवाद
श्री राम के हरम की परम सुन्दरी स्त्रियाँ - सीतादेवी और उनकी सखियाँ अवश्य ही अत्यन्त प्रसन्न होंगी और तुम्हारी बहुएँ भरत के अधिकार के नष्ट हो जाने से शोक से भर जाएँगी।॥12॥
 
'The most beautiful women of Sri Rama's harem - Sita Devi and her friends will certainly be very happy and your daughters-in-law will be filled with grief at the loss of Bharat's authority.'॥ 12॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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