श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 8: मन्थरा का पुनः राज्याभिषेक को कैकेयी के लिये अनिष्टकारी बताना, कुब्जा का पुनः श्रीराम राज्य को भरत के लिये भयजनक बताकर कैकेयी को भड़काना  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  2.8.11 
एवं च त्वं सहास्माभिस्तस्या: प्रेष्या भविष्यसि।
पुत्रश्च तव रामस्य प्रेष्यत्वं हि गमिष्यति॥ ११॥
 
 
अनुवाद
'इस प्रकार हमारे साथ तुम भी कौशल्या की दासी बन जाओगी और तुम्हारे पुत्र भरत को भी श्रीराम का दास बनना पड़ेगा।
 
'In this way, along with us, you too will become Kausalya's maid and your son Bharata too will have to serve as Sri Rama's slave.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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