श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 8: मन्थरा का पुनः राज्याभिषेक को कैकेयी के लिये अनिष्टकारी बताना, कुब्जा का पुनः श्रीराम राज्य को भरत के लिये भयजनक बताकर कैकेयी को भड़काना  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  2.8.10 
प्राप्तां वसुमतीं प्रीतिं प्रतीतां हतविद्विषम्।
उपस्थास्यसि कौसल्यां दासीवत् त्वं कृताञ्जलि:॥ १०॥
 
 
अनुवाद
'वे पृथ्वी पर स्वतन्त्र राज्य करके प्रसन्न होंगी; क्योंकि वे राजा की विश्वासपात्र हैं और तुम दासी की भाँति हाथ जोड़े उनकी सेवा में उपस्थित रहोगी। 10॥
 
'She will be happy to have a free reign on the earth; Because they are the king's confidants and you will be present in their service with folded hands like a maid. 10॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd