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श्लोक 2.79.7  |
ज्येष्ठस्य राजता नित्यमुचिता हि कुलस्य न:।
नैवं भवन्तो मां वक्तुमर्हन्ति कुशला जना:॥ ७॥ |
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| अनुवाद |
| ‘सज्जनों! आप लोग तो बुद्धिमान हैं, आपको मुझसे ऐसी बात नहीं कहनी चाहिए। हमारे कुल में तो ज्येष्ठ पुत्र ही राजसिंहासन का उत्तराधिकारी होता आया है और यह बात उचित भी है।॥7॥ |
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| ‘Gentlemen! You are wise people, you should not say such a thing to me. In our family, the eldest son has always been the heir to the throne and this is also right.॥ 7॥ |
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