श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 79: भरत का अभिषेक-सामग्री की परिक्रमा करके श्रीराम को ही राज्य का अधिकारी बताकर उन्हें लौटा लाने के लिये चलने के निमित्त व्यवस्था करने की सबको आज्ञा देना  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  2.79.7 
ज्येष्ठस्य राजता नित्यमुचिता हि कुलस्य न:।
नैवं भवन्तो मां वक्तुमर्हन्ति कुशला जना:॥ ७॥
 
 
अनुवाद
‘सज्जनों! आप लोग तो बुद्धिमान हैं, आपको मुझसे ऐसी बात नहीं कहनी चाहिए। हमारे कुल में तो ज्येष्ठ पुत्र ही राजसिंहासन का उत्तराधिकारी होता आया है और यह बात उचित भी है।॥7॥
 
‘Gentlemen! You are wise people, you should not say such a thing to me. In our family, the eldest son has always been the heir to the throne and this is also right.॥ 7॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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