श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 79: भरत का अभिषेक-सामग्री की परिक्रमा करके श्रीराम को ही राज्य का अधिकारी बताकर उन्हें लौटा लाने के लिये चलने के निमित्त व्यवस्था करने की सबको आज्ञा देना  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  2.79.13 
क्रियतां शिल्पिभि: पन्था: समानि विषमाणि च।
रक्षिणश्चानुसंयान्तु पथि दुर्गविचारका:॥ १३॥
 
 
अनुवाद
कारीगरों को आगे बढ़कर मार्ग बनाना चाहिए, ऊबड़-खाबड़ भूमि को समतल करना चाहिए तथा मार्ग के दुर्गम स्थानों को जानने वाले रक्षकों को भी उनके साथ जाना चाहिए।॥13॥
 
‘The craftsmen should go ahead and make the road, level the uneven ground and guards having knowledge of the inaccessible places on the road should also accompany them.’॥ 13॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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