श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 76: राजा दशरथ का अन्त्येष्टि संस्कार  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  2.76.8 
योगक्षेमं तु तेऽव्यग्रं कोऽस्मिन् कल्पयिता पुरे।
त्वयि प्रयाते स्वस्तात रामे च वनमाश्रिते॥ ८॥
 
 
अनुवाद
'पिताजी! आप तो स्वर्गलोक में चले गए हैं और श्री रामजी ने वन में शरण ली है - ऐसी स्थिति में आपकी नगरी में कौन निश्चिंत होकर प्रजा का कल्याण करेगा?॥ 8॥
 
'Father! You have gone to heaven and Shri Ram has taken refuge in the forest - in such a situation, who will ensure the welfare of the people in your city without any worries?॥ 8॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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