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ramayan 2.76.5: तत्पश्चात उन्होंने मृत राजा दशरथ को नहला-पोंछकर नाना प्रकार के रत्नों से विभूषित उत्तम शय्या (विमान) पर सुला दिया, तब उनके पुत्र भरत अत्यन्त दुःखी होकर विलाप करने लगे-॥5॥   |   ramayan सर्ग 2.76: राजा दशरथ का अन्त्येष्टि संस्कार   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 76: राजा दशरथ का अन्त्येष्टि संस्कार  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  2.76.5 
संवेश्य शयने चाग्रॺे नानारत्नपरिष्कृते।
ततो दशरथं पुत्रो विललाप सुदु:खित:॥ ५॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात उन्होंने मृत राजा दशरथ को नहला-पोंछकर नाना प्रकार के रत्नों से विभूषित उत्तम शय्या (विमान) पर सुला दिया, तब उनके पुत्र भरत अत्यन्त दुःखी होकर विलाप करने लगे-॥5॥
 
Thereafter, after washing and wiping the dead king Dasharatha, he laid him to sleep on a fine bed (plane) decorated with different types of gems, his son Bharat became very sad and started mourning -॥ 5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)