श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 76: राजा दशरथ का अन्त्येष्टि संस्कार  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  2.76.4 
उद्‍धृत्य तैलसंसेकात् स तु भूमौ निवेशितम्।
आपीतवर्णवदनं प्रसुप्तमिव भूमिपम्॥ ४॥
 
 
अनुवाद
राजा दशरथ का शरीर तेल के कड़ाह से निकालकर भूमि पर रख दिया गया। बहुत देर तक तेल में पड़े रहने के कारण उनका मुख कुछ पीला पड़ गया था। उन्हें देखकर ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो पृथ्वी के स्वामी दशरथ सो रहे हों॥4॥
 
King Dasharath's body was taken out of the oil cauldron and placed on the ground. His face had become somewhat pale due to lying in the oil for a long time. Looking at him it appeared as if the lord of the earth Dasharath was sleeping.॥ 4॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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