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श्लोक 2.76.23  |
कृत्वोदकं ते भरतेन सार्धं
नृपाङ्गना मन्त्रिपुरोहिताश्च।
पुरं प्रविश्याश्रुपरीतनेत्रा
भूमौ दशाहं व्यनयन्त दु:खम्॥ २३॥ |
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| अनुवाद |
| भरत के साथ रानियों, मंत्रियों और पुरोहितों ने भी राजा को जल अर्पित किया। फिर वे सब आँसू बहाते हुए नगर में आए और दस दिन तक भूमि पर सोकर बड़े दुःख के साथ अपना समय बिताया। |
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| Along with Bharata, the queens, ministers and priests also offered water-offerings to the king. Then all of them came to the city shedding tears and spent their time with great sorrow, sleeping on the ground for ten days. |
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इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीये आदिकाव्येऽयोध्याकाण्डे षट्सप्ततितम: सर्ग:॥ ७६॥
इस प्रकार श्रीवाल्मीकिनिर्मित आर्षरामायण आदिकाव्यके अयोध्याकाण्डमें छिहत्तरवाँ सर्ग पूरा हुआ॥ ७६॥ |
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