श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 76: राजा दशरथ का अन्त्येष्टि संस्कार  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  2.76.2 
अलं शोकेन भद्रं ते राजपुत्र महायश:।
प्राप्तकालं नरपते: कुरु संयानमुत्तमम्॥ २॥
 
 
अनुवाद
‘महाराज! आपका कल्याण हो। इस शोक को त्याग दीजिए, क्योंकि इससे कुछ भी प्राप्त नहीं होगा। अब समयानुकूल कर्तव्य पर ध्यान दीजिए। राजा दशरथ के पार्थिव शरीर को दाह संस्कार के लिए ले जाने की उत्तम व्यवस्था कीजिए।’॥2॥
 
‘Great prince! May you be blessed. Leave this grief, because it will not achieve anything. Now concentrate on the timely duty. Make the best arrangements to carry the body of King Dasharath for cremation.’॥2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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