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श्लोक 12
श्लोक
2.76.12
तथेति भरतो वाक्यं वसिष्ठस्याभिपूज्य तत्।
ऋत्विक्पुरोहिताचार्यांस्त्वरयामास सर्वश:॥ १२॥
अनुवाद
तब 'बहुत अच्छा' कहकर भरत ने वसिष्ठजी की आज्ञा ली और ऋत्विक, पुरोहित तथा आचार्य सभी को इस कार्य के लिए शीघ्रता करने को कहा।
Then saying 'very good', Bharat took Vasishthaji's orders and asked Ritwik, priest and Acharya all to hurry up for this work.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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