| श्रीमद् वाल्मीकि रामायण » काण्ड 2: अयोध्या काण्ड » सर्ग 76: राजा दशरथ का अन्त्येष्टि संस्कार » श्लोक 12 |
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| | | | श्लोक 2.76.12  | तथेति भरतो वाक्यं वसिष्ठस्याभिपूज्य तत्।
ऋत्विक्पुरोहिताचार्यांस्त्वरयामास सर्वश:॥ १२॥ | | | | | | अनुवाद | | तब 'बहुत अच्छा' कहकर भरत ने वसिष्ठजी की आज्ञा ली और ऋत्विक, पुरोहित तथा आचार्य सभी को इस कार्य के लिए शीघ्रता करने को कहा। | | | | Then saying 'very good', Bharat took Vasishthaji's orders and asked Ritwik, priest and Acharya all to hurry up for this work. | | ✨ ai-generated | | |
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