श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 76: राजा दशरथ का अन्त्येष्टि संस्कार  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  2.76.11 
प्रेतकार्याणि यान्यस्य कर्तव्यानि विशाम्पते:।
तान्यव्यग्रं महाबाहो क्रियतामविचारितम्॥ ११॥
 
 
अनुवाद
महाबाहो! इन महाराज के लिए जो भी अनुष्ठान करना हो, उसे शान्त मन से बिना किसी संकोच के करो। ॥11॥
 
'Mahabaho! Whatever rituals are to be done for this Maharaja, do them with a calm mind without any hesitation.' ॥11॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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