श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 76: राजा दशरथ का अन्त्येष्टि संस्कार  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  2.76.1 
तमेवं शोकसंतप्तं भरतं कैकयीसुतम्।
उवाच वदतां श्रेष्ठो वसिष्ठ: श्रेष्ठवागृषि:॥ १॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार श्रेष्ठ वक्ता महर्षि वसिष्ठ ने शोकग्रस्त केकयपुत्र भरत से उत्तम वचनों में कहा-
 
Thus, the great sage Vasishtha, the best of speakers, said to Bharata, the son of Kekai, who was grief-stricken, in excellent words—
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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