श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 75: कौसल्या के सामने भरत का शपथ खाना  »  श्लोक 51
 
 
श्लोक  2.75.51 
मायया रमतां नित्यं पुरुष: पिशुनोऽशुचि:।
राज्ञो भीतस्त्वधर्मात्मा यस्यार्योऽनुमते गत:॥ ५१॥
 
 
अनुवाद
जिसके कहने पर भाई राम ने वन को प्रस्थान किया, वह पापी मनुष्य चुगलखोर, अपवित्र, राजा से डरने वाला और सदैव छल-कपट में लिप्त रहने वाला है ॥ 51॥
 
'On whose advice brother Rama left for the forest, that sinful man is a backbiter, is impure, fearful of the king and is always involved in deceit and fraud. ॥ 51॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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