| श्रीमद् वाल्मीकि रामायण » काण्ड 2: अयोध्या काण्ड » सर्ग 75: कौसल्या के सामने भरत का शपथ खाना » श्लोक 41 |
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| | | | श्लोक 2.75.41  | मद्यप्रसक्तो भवतु स्त्रीष्वक्षेषु च नित्यश:।
कामक्रोधाभिभूतश्च यस्यार्योऽनुमते गत:॥ ४१॥ | | | | | | अनुवाद | | 'जिसके कहने पर भगवान राम को वन जाना पड़ा, वह काम और क्रोध से ग्रस्त होकर सदैव मदिरापान, स्त्रियों के साथ सहवास और जुआ खेलने में आसक्त रहता है॥ 41॥ | | | | 'The one on whose advice Lord Rama had to go to the forest, being overcome by lust and anger, is always addicted to drinking wine, having sex with women and gambling.॥ 41॥ | | ✨ ai-generated | | |
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