| श्रीमद् वाल्मीकि रामायण » काण्ड 2: अयोध्या काण्ड » सर्ग 75: कौसल्या के सामने भरत का शपथ खाना » श्लोक 28 |
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| | | | श्लोक 2.75.28  | उपदिष्टं सुसूक्ष्मार्थं शास्त्रं यत्नेन धीमता।
स नाशयतु दुष्टात्मा यस्यार्योऽनुमते गत:॥ २८॥ | | | | | | अनुवाद | | 'वह दुष्टात्मा, जिसके उपदेश से आर्य श्री राम को वन जाना पड़ा, वह शास्त्रों के सूक्ष्म विषयों की उन शिक्षाओं को भूल जाए, जो उसने बुद्धिमान गुरु से यत्नपूर्वक प्राप्त की थीं ॥28॥ | | | | 'May that evil soul, on whose advice Arya Shri Ram had to leave for the forest, forget the teachings on the subtle subjects of the scriptures which he received diligently from the wise Guru. 28॥ | | ✨ ai-generated | | |
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