श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 74: भरत का कैकेयी को कड़ी फटकार देना  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  2.74.9 
न त्वमश्वपते: कन्या धर्मराजस्य धीमत:।
राक्षसी तत्र जातासि कुलप्रध्वंसिनी पितु:॥ ९॥
 
 
अनुवाद
तू बुद्धिमान धर्मराज अश्वपति की पुत्री नहीं है, तू उनके कुल में उत्पन्न हुई राक्षसी है, जो अपने पिता के वंश का नाश करेगी॥9॥
 
‘You are not the daughter of the wise Dharmaraja Ashwapati. You are a demoness born in his family who will destroy your father's lineage.॥ 9॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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