vedamrit
Reset
Home
ग्रन्थ
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
श्रीमद् भगवद गीता
______________
श्री विष्णु पुराण
श्रीमद् भागवतम
______________
श्रीचैतन्य भागवत
वैष्णव भजन
About
Contact
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
»
काण्ड 2: अयोध्या काण्ड
»
सर्ग 74: भरत का कैकेयी को कड़ी फटकार देना
»
श्लोक 8
श्लोक
2.74.8
कौसल्या च सुमित्रा च याश्चान्या मम मातर:।
दु:खेन महताविष्टास्त्वां प्राप्य कुलदूषिणीम्॥ ८॥
अनुवाद
'कौसल्या, सुमित्रा तथा मेरी अन्य माताएँ तुम्हारे कारण बड़े दुःख में हैं, क्योंकि तुमने कुल को कलंकित किया है।
‘Kausalya, Sumitra and my other mothers are all in great sorrow because of you, who have brought disgrace to the family.
✨ ai-generated
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas