श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 74: भरत का कैकेयी को कड़ी फटकार देना  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  2.74.6 
त्वत्कृते मे पिता वृत्तो रामश्चारण्यमाश्रित:।
अयशो जीवलोके च त्वयाहं प्रतिपादित:॥ ६॥
 
 
अनुवाद
'तुम्हारे कारण ही मेरे पिता की मृत्यु हुई, श्री राम को वन में शरण लेनी पड़ी और तुमने मुझे इस संसार में अपयश का भागी भी बनाया।॥6॥
 
'Because of you my father died, Shri Ram had to take refuge in the forest and you also made me a part of the infamy in this world.॥ 6॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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