| श्रीमद् वाल्मीकि रामायण » काण्ड 2: अयोध्या काण्ड » सर्ग 74: भरत का कैकेयी को कड़ी फटकार देना » श्लोक 33 |
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| | | | श्लोक 2.74.33  | सा त्वमग्निं प्रविश वा स्वयं वा विश दण्डकान्।
रज्जुं बद्ध्वाथवा कण्ठे नहि तेऽन्यत् परायणम्॥ ३३॥ | | | | | | अनुवाद | | 'अब या तो तू जलती हुई अग्नि में प्रवेश कर, या स्वयं दण्डकारण्य में चला जा, अथवा रस्सी से लटककर प्राण त्याग दे, तेरे लिए और कोई उपाय नहीं है।॥ 33॥ | | | | 'Now either you enter the burning fire, or go to Dandakaranya yourself, or give up your life by hanging yourself with a rope, there is no other option for you.॥ 33॥ | | ✨ ai-generated | | |
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